गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी थीं, और दिल्ली का दम घोंटने वाला मौसम पीछे छूट गया था। आरव और उसकी छोटी बहन तनीषा, अपने नाना-नानी के गाँव किलेड़ी आए थे — एक छोटा सा गाँव जो राजस्थान के रेगिस्तानी विस्तार के बीच बसा था। गाँव के एक किनारे पर था गढ़ रायगढ़ — एक प्राचीन किला, जिसकी ऊँची-ऊँची दीवारें आज भी वीरता की कहानियाँ चुपचाप सुनाती थीं। "नाना, क्या सच में इस किले में गुप्त रास्ते और खज़ाने छिपे हैं?" तनीषा ने चाय की प्याली थामते हुए आँखें फैलाकर पूछा। नाना मुस्कुराए, उनकी झुर्रियों से भरा चेहरा कहानियों का खजाना लगता था। "बिलकुल हैं, बेटा," उन्होंने कहा। "यह किला कोई साधारण जगह नहीं। यहाँ इतिहास अब भी सांस लेता है। अगर ध्यान से सुनो, तो दीवारें भी कहानियाँ कहती हैं।" आरव को लगा जैसे नाना का हर शब्द एक चुनौती हो। "कल सुबह हम किले की खोज पर निकलेंगे," उसने तय कर लिया। अगली सुबह सूरज जब अभी लाल था और हवाओं में रेगिस्तान की ठंडी महक थी, दोनों भाई-बहन अपने छोटे से बैग और कैमरे के साथ निकल पड़े। पगडंडी पत्थरों और काँटेदार झाड़ियों से भरी थी। दूर...