विक्रम को अनन्या के बंगले से निकलते हुए देखने के बाद, रोहन की रातों की नींद उड़ गई थी. सिर्फ़ व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता ही नहीं, बल्कि एक अजीब सी निजी ईर्ष्या उसके अंदर पनप रही थी. अगली सुबह, वह समीर के साथ अपने पेंटहाउस में बैठकर चाय पी रहा था, लेकिन उसके दिमाग में वही दृश्य घूम रहे थे. "यार समीर, विक्रम उस गली में क्या कर रहा था?" रोहन ने परेशान होकर पूछा. "कहीं वह भी...?" समीर ने अपनी दाढ़ी खुजाई. "क्यों नहीं? अनन्या सिर्फ़ खूबसूरत ही नहीं है, उसके पिता एक बड़े आर्किटेक्ट हैं, उनका अच्छा खासा नाम है. विक्रम जैसा महत्वाकांक्षी आदमी, जो हर चीज़ में नंबर वन रहना चाहता है, उसके लिए यह एक अच्छा 'प्रोजेक्ट' हो सकता है." समीर ने 'प्रोजेक्ट' शब्द पर ज़ोर दिया, यह जानते हुए कि रोहन को यह पसंद नहीं आएगा. "प्रोजेक्ट नहीं," रोहन ने कहा, "वह एक इंसान है, समीर!" "हाँ, तो तुम भी तो उसी इंसान को जानने के लिए मिठाईवाला बने फिर रहे हो," समीर ने मज़ाक किया. "फर्क़ सिर्फ़ इतना है कि वह अपने असली रूप में जा रह...