नाशिक स्टेशन की ओर बढ़ती भारत एक्सप्रेस के साथ , सेंट्रल कमांड सेंटर में हर गुज़रता पल भारी होता जा रहा था। शिबानी ने अपनी आँखों से स्क्रीन पर चमकते ट्रेन के आइकन को एक पल के लिए भी ओझल नहीं होने दिया। उसके दिमाग में नाशिक स्टेशन का लेआउट घूम रहा था - भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म , सैकड़ों दुकानें , और लाखों लोग जो हर दिन वहाँ से गुज़रते थे। एक दुर्घटना वहाँ अकल्पनीय तबाही मचा सकती थी। " इंस्पेक्टर राजेश , क्या आप एक्सेस पैनल खोल पाए ?" शिबानी ने हेडसेट पर पूछा , उसकी आवाज़ में बेचैनी थी। राजेश की आवाज़ में तनाव था। "मैम , यह बहुत मुश्किल है! पैनल बहुत कसकर बंद है और हमें इसे खोलने के लिए सही उपकरण नहीं मिल रहे हैं। हम सिर्फ़ अपने हाथों और कुछ बुनियादी औज़ारों का उपयोग कर रहे हैं।" " कोशिश करते रहिए , इंस्पेक्टर! समय नहीं है!" शिबानी ने कहा। उसे पता था कि राजेश की टीम के पास बहुत कम विकल्प थे। शिबानी ने तुरंत नाशिक स्टेशन के आपातकालीन प्रोटोकॉल को सक्रिय करने के लिए एक आदेश जारी किया। इसमें आपातकालीन शटडाउन स्विच , ट्रैक ब्लॉकिंग और यात्र...