नाशिक स्टेशन की ओर बढ़ती भारत एक्सप्रेस के साथ, सेंट्रल कमांड सेंटर में हर गुज़रता पल भारी होता जा रहा था। शिबानी ने अपनी आँखों से स्क्रीन पर चमकते ट्रेन के आइकन को एक पल के लिए भी ओझल नहीं होने दिया। उसके दिमाग में नाशिक स्टेशन का लेआउट घूम रहा था - भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म, सैकड़ों दुकानें, और लाखों लोग जो हर दिन वहाँ से गुज़रते थे। एक दुर्घटना वहाँ अकल्पनीय तबाही मचा सकती थी।
"इंस्पेक्टर राजेश, क्या आप एक्सेस पैनल खोल पाए?" शिबानी ने हेडसेट पर पूछा, उसकी आवाज़ में बेचैनी थी।
राजेश की आवाज़ में तनाव था। "मैम, यह बहुत मुश्किल है! पैनल बहुत कसकर बंद है और हमें इसे खोलने के लिए सही उपकरण नहीं मिल रहे हैं। हम सिर्फ़ अपने हाथों और कुछ बुनियादी औज़ारों का उपयोग कर रहे हैं।"
"कोशिश करते रहिए, इंस्पेक्टर! समय नहीं है!" शिबानी ने कहा। उसे पता था कि राजेश की टीम के पास बहुत कम विकल्प थे।
शिबानी ने तुरंत नाशिक स्टेशन के आपातकालीन प्रोटोकॉल को सक्रिय करने के लिए एक आदेश जारी किया। इसमें आपातकालीन शटडाउन स्विच, ट्रैक ब्लॉकिंग और यात्रियों को सतर्क करने के लिए सार्वजनिक घोषणा प्रणाली शामिल थी। लेकिन उसने स्टेशन खाली करने का आदेश नहीं दिया था, जैसा कि उसने मिस्टर वर्मा से कहा था। वह हमलावर को अपनी चाल का पता नहीं लगने देना चाहती थी।
"सर, हमें नाशिक के सभी इनकमिंग और आउटगोइंग ट्रैक को तुरंत ब्लॉक करना होगा। कोई भी ट्रेन स्टेशन में प्रवेश न करे और कोई भी ट्रेन बाहर न जाए!" शिबानी ने वर्मा जी से कहा।
"लेकिन इससे अराजकता फैल जाएगी, शिबानी! " वर्मा जी ने हिचकिचाते हुए कहा।
"यह जोखिम हमें लेना होगा, सर! अराजकता एक दुर्घटना से बेहतर है। " शिबानी ने दृढ़ता से कहा।
वर्मा जी ने अनिच्छा से आदेश जारी किया। पूरे नाशिक स्टेशन पर, अचानक सभी ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई, जिससे यात्रियों में भ्रम फैल गया। घोषणाएँ की गईं कि यह एक "अपरिहार्य तकनीकी समस्या" के कारण है।
शिबानी ने अपनी आँखें स्क्रीन पर केंद्रित रखीं। उसे हमलावर के वीडियो संदेश में कुछ अजीब लगा था। नकाबपोश व्यक्ति के पीछे की background... वह एक अंधेरा कमरा था, लेकिन एक पल के लिए, उसे एक विशिष्ट प्रकार की पुरानी रेलवे सिग्नलिंग मशीन का एक धुंधला सिल्हूट दिखाई दिया था।
"वह कहाँ से काम कर रहा है?" शिबानी बुदबुदाई। "एक पुराना सिग्नलिंग मशीन... इसका मतलब है कि वह किसी पुराने रेलवे यार्ड या डिपो में हो सकता है।"
उसने तुरंत अपने टर्मिनल पर भारतीय रेलवे के सभी पुराने, निष्क्रिय यार्डों और डिपो की सूची खोली। सूची बहुत लंबी थी। उसे इसे संकीर्ण करना होगा।
तभी, राजेश की आवाज़ हेडसेट पर खुशी से चिल्लाई। "मैम! हमने पैनल खोल दिया है! हम ड्राइवर केबिन के अंदर हैं!"
शिबानी के चेहरे पर राहत की एक लहर दौड़ गई। "Good, इंस्पेक्टर! क्या ड्राइवर मौजूद है? क्या आप नियंत्रण वापस ले सकते हैं?"
"ड्राइवर बेहोश है, मैम! शायद हमलावर ने उसे निष्क्रिय कर दिया था। और यहाँ नियंत्रण पैनल पर एक अजीब सा इंटरफ़ेस है, जो हमारे सामान्य सिस्टम से अलग है," राजेश ने कहा।
शिबानी ने तुरंत अपने टर्मिनल पर उस विशिष्ट इंटरफ़ेस के ब्लू प्रिंट्स को खंगालना शुरू किया। यह एक पुराना, आपातकालीन नियंत्रण इंटरफ़ेस था, जिसे विशेष परिस्थितियों के लिए डिज़ाइन किया गया था, और यह मुख्य डिजिटल नेटवर्क से अलग था।
"इंस्पेक्टर, उस इंटरफ़ेस पर 'इमरजेंसी स्टॉप' बटन होगा। उसे दबाएँ! और फिर, मैन्युअल थ्रॉटल को पूरी तरह से नीचे खींचें!" शिबानी ने निर्देश दिया।
राजेश ने तुरंत निर्देशों का पालन किया। उसने इमरजेंसी स्टॉप बटन दबाया, और फिर मैन्युअल थ्रॉटल को नीचे खींचा। ट्रेन के अंदर एक तेज़ झटका लगा, और फिर, धीरे-धीरे, भारत एक्सप्रेस की गति कम होने लगी।
सेंट्रल कमांड सेंटर में मौजूद सभी लोगों ने राहत की साँस ली। स्क्रीन पर, ट्रेन का आइकन अब धीमी गति से आगे बढ़ रहा था, नाशिक स्टेशन की ओर, लेकिन अब वह नियंत्रण में थी।
"हमने इसे कर दिखाया!" मिस्टर वर्मा ने खुशी से कहा।
"अभी नहीं, सर," शिबानी ने कहा, उसकी आँखें अभी भी स्क्रीन पर टिकी थीं। "ट्रेन सुरक्षित है, लेकिन हमलावर अभी भी आज़ाद है। और वह अभी भी कहीं से हमें देख रहा है।"
शिबानी ने नकाबपोश व्यक्ति के वीडियो में देखी गई पुरानी सिग्नलिंग मशीन के सिल्हूट पर ध्यान केंद्रित किया। उसे पता था कि हमलावर को ढूंढने की कुंजी उसी में छिपी थी। यह सिर्फ़ ट्रेन को बचाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि भारतीय रेलवे के भविष्य को सुरक्षित करने की लड़ाई थी।
To be Continued..........
- Brij

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