कल्याण जंक्शन पर अराजकता का माहौल था। भारत एक्सप्रेस, अपनी पूरी गति पर, प्लेटफॉर्म से गुज़रने वाली थी। इंस्पेक्टर राजेश और उनकी टीम, जिसमें दो और RPF अधिकारी शामिल थे, एक अलग रेलवे इंजन पे सवार थे वो उसे भारत एक्सप्रेस की रफ़्तार के सामानांतर रखते हुए उसमे छलांग लगाने वाले थे, उनके चेहरे पर दृढ़ संकल्प था, लेकिन आँखों में आने वाले खतरे की गंभीरता साफ़ झलक रही थी।
"तैयार हो जाओ!" राजेश ने चिल्लाकर कहा, जैसे ही ट्रेन का विशालकाय इंजन दूर से दिखाई देने लगा। उसकी गति इतनी तेज़ थी कि हवा में एक गड़गड़ाहट भर गई।
शिबानी के हेडसेट से राजेश की आवाज़ आ रही थी। "इंस्पेक्टर राजेश, आपको ट्रेन के पिछले हिस्से के दरवाज़े से चढ़ना होगा। हमलावर ने मुख्य ड्राइवर केबिन को लॉक कर दिया होगा, लेकिन पिछले गार्ड कंपार्टमेंट में भी एक इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम हो सकता है। आपको उसे ढूंढना होगा!"
"समझ गया, मैम!" राजेश ने जवाब दिया, उसकी आवाज़ हवा के शोर में लगभग खो गई थी।
जैसे ही ट्रेन उनके पास से गुज़री, राजेश और उसकी टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर, चलती ट्रेन के इंजन के दरवाज़ों से भारत एक्सप्रेस में छलांग लगाई। यह एक खतरनाक युद्धाभ्यास था, लेकिन वे सफल रहे। अंदर पहुँचते ही, उन्होंने तुरंत गार्ड कंपार्टमेंट की ओर दौड़ लगाई।
सेंट्रल कमांड सेंटर में, शिबानी की आँखें स्क्रीन पर टिकी थीं। भारत एक्सप्रेस का आइकन अब शिवाजी नगर से मुश्किल से एक मिनट की दूरी पर था। ट्रेन की गति लगातार बढ़ रही थी, और मोड़ पर दुर्घटना का खतरा बढ़ता जा रहा था।
"शिवाजी नगर हब! क्या आप तैयार हैं?" शिबानी ने माइक्रोफ़ोन में चिल्लाकर पूछा।
दूसरी ओर से, एक बूढ़े, अनुभवी रेलवे कर्मचारी की आवाज़ आई, "हम तैयार हैं, मैम! हमने मैन्युअल सिग्नल को लाल कर दिया है, और ट्रैक स्विच को धीमा करने के लिए तैयार रखा है। लेकिन ट्रेन की गति बहुत ज़्यादा है!"
"मुझे पता है! आपको धीरे-धीरे, लेकिन लगातार दबाव डालना होगा। ट्रेन के गुजरते ही ट्रैक स्विच को सक्रिय करें, ताकि वह गति कम करने के लिए मजबूर हो जाए!" शिबानी ने निर्देश दिया। यह एक जोखिम भरा कदम था, क्योंकि गलत समय पर सक्रिय होने से ट्रेन पटरी से उतर सकती थी।
ट्रेन शिवाजी नगर स्टेशन के करीब पहुँच गई। शिबानी ने स्क्रीन पर देखा - हमलावर का कोई नया संदेश नहीं था। वह शायद अपने 'आश्चर्य' के परिणाम का इंतज़ार कर रहा था।
अचानक, राजेश की आवाज़ हेडसेट पर आई, हाँफते हुए। "मैम! हम गार्ड कंपार्टमेंट में हैं! यहाँ एक पुराना ब्रेकिंग लीवर है! यह डिजिटल सिस्टम से जुड़ा नहीं लगता!"
"Good, इंस्पेक्टर! उसे सक्रिय करें! धीरे-धीरे, लेकिन पूरी ताकत से!" शिबानी ने निर्देश दिया।
राजेश ने लीवर को पकड़ लिया। वह भारी था और वर्षों से इस्तेमाल नहीं हुआ था। उसने अपने साथियों की मदद से उसे खींचना शुरू किया। ट्रेन के नीचे से एक तेज़ चीखने की आवाज़ आई, जैसे धातु धातु से रगड़ रही हो। ट्रेन की गति में हल्की कमी आई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं थी।
शिवाजी नगर हब पर, बूढ़े कर्मचारी ने अपनी पूरी ताकत से ट्रैक स्विच को सक्रिय किया। ट्रेन का अगला हिस्सा मोड़ की ओर मुड़ना शुरू हुआ, और एक भयानक आवाज़ के साथ, ट्रेन के पहिए ट्रैक पर फिसलने लगे। ट्रेन एक तरफ झुकने लगी, जिससे अंदर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया।
शिबानी की साँसें अटक गईं। स्क्रीन पर, भारत एक्सप्रेस का आइकन लाल हो गया और एक चेतावनी संदेश फ्लैश हुआ: "पटरी से उतरने का खतरा!"
"और ज़ोर लगाओ, इंस्पेक्टर! पूरी ताकत से!" शिबानी ने चिल्लाकर कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था।
राजेश और उसकी टीम ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। लीवर धीरे-धीरे नीचे आया। शिवाजी नगर हब पर, ट्रैक स्विच ने अपना काम किया था, और ट्रेन, एक भयानक चीख के साथ, मोड़ पर अपनी गति थोड़ी कम करने में सफल रही।
ट्रेन लड़खड़ाती हुई, लेकिन पटरी पर बनी रही, खतरनाक मोड़ से गुज़र गई। शिबानी ने राहत की साँस ली, लेकिन यह सिर्फ़ एक पल की थी। ट्रेन अभी भी तेज़ी से आगे बढ़ रही थी, और हमलावर अभी भी सक्रिय था।
"हमलावर ने हमें चौंका दिया, लेकिन हम बच गए," शिबानी ने बुदबुदाया। "अब हमें उसे ढूंढना होगा। यह व्यक्तिगत है।"
स्क्रीन पर, ट्रेन का आइकन अब सुरक्षित रूप से मोड़ से आगे बढ़ चुका था, लेकिन उसकी गति अभी भी निर्धारित से अधिक थी। शिबानी को पता था कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई थी। हमलावर ने अपना पहला दाँव खेला था, और अब शिबानी की बारी थी। उसे रेलवे के इस अदृश्य दुश्मन को बेनकाब करना था, इससे पहले कि वह कोई और भयानक चाल चलता।
To be Continued.........
- Brij

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