बंगलुरू की रातें, सिलिकॉन वैली की चमक और दक्षिण भारत की पारंपरिक खुशबू का एक अनूठा मिश्रण थीं. गगनचुंबी इमारतें तारों को छूने की होड़ में थीं, और उनके नीचे, पब और कैफे में युवा पीढ़ी की धड़कनें गूँज रही थीं.
इसी शहर के सबसे पॉश पेंटहाउस में बैठा था रोहन मल्होत्रा, 'टेक-गुरु' और 'मिलेनियल बिलियनेयर' के नाम से मशहूर. उसकी कंपनी, 'इन्नोवोटेक', ने हाल ही में एक नया AI प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया था, जिसने उसे रातों-रात और भी ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया था.
लेकिन आज, रोहन के चेहरे पर वह चमक नहीं थी जो आमतौर पर उसकी सफलताओं के बाद दिखती थी. उसके सामने एक ट्रे में महंगी विदेशी शराब रखी थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था. वह अपनी बालकनी से शहर की रोशनी को देख रहा था, जहाँ हर चमकती खिड़की के पीछे एक अलग कहानी थी.
"क्या हुआ मेरे दोस्त? अरबों का सौदा हो गया, फिर भी मुँह लटका हुआ है?" उसके बचपन का दोस्त और 'इन्नोवोटेक' का सह-संस्थापक, समीर, उसके बगल में आकर बैठा. समीर ही था जिससे रोहन अपनी हर बात साझा करता था.
रोहन ने एक गहरी साँस ली. "यार, पेरेंट्स ने फिर से शादी का राग अलापना शुरू कर दिया है. आज सुबह ही तीन नए बायोडाटा भेजे हैं."
समीर हँस पड़ा. "तो क्या हुआ? तुम तो देश के सबसे एलिजिबल बैचलर्स में से एक हो. लाइन लगी होगी लड़कियों की."
"वही तो दिक्कत है!" रोहन ने झुंझलाते हुए कहा. "यह सब इतना फॉर्मल है, इतना दिखावटी. एक घंटे की मीटिंग, जिसमें सब अपनी सबसे अच्छी साइड दिखाते हैं. मैं जानना चाहता हूँ कि लड़की असल में कैसी है, जब वह अपने कम्फर्ट ज़ोन में हो, बिना किसी दबाव के."
"तो क्या चाहते हो?" समीर ने मज़ाक में कहा. "जाओ और हर लड़की के घर में छुपकर देखो कि वह क्या करती है?"
रोहन की आँखों में अचानक एक चमक आई. "शायद... शायद ऐसा ही कुछ!"
समीर ने उसे अविश्वास से देखा. "क्या मतलब?"
"देखो, समीर," रोहन ने उत्साह से कहा, "मुझे अरेंज्ड मैरिज के कॉन्सेप्ट से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन मुझे यह जानना है कि मेरी पार्टनर कैसी है, उसकी आदतें क्या हैं, उसका स्वभाव कैसा है, जब वह अपने परिवार के साथ हो. बिना किसी 'फर्स्ट इंप्रेशन' के दबाव के."
"और तुम यह कैसे करोगे?" समीर ने चुनौती दी. "तुम रोहन मल्होत्रा हो. तुम कहीं भी जाओगे, लोग तुम्हें पहचान लेंगे."
"इसलिए मुझे भेष बदलना होगा," रोहन ने कहा. "एक ऐसा भेष, जिससे मैं आसानी से घरों में घुस सकूँ, लोगों से मिल सकूँ, और कोई मुझे पहचान न पाए."
समीर ने कुछ देर सोचा, फिर उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई. "मुझे एक आइडिया है. कुछ ऐसा जो पुराना भी है और आज भी लोगों के घरों में आसानी से पहुँच जाता है."
अगले कुछ दिनों में, रोहन की दुनिया पूरी तरह बदल गई. उसने अपने डिजाइनर कपड़े अलमारी में बंद कर दिए और पुराने, ढीले-ढाले कुर्ते-पायजामे पहन लिए.
उसकी महंगी स्पोर्ट्स कार की जगह, एक पुरानी, जंग लगी साइकिल ने ले ली, जिस पर दो बड़े-बड़े बाँस के डंडे लगे थे. उन डंडों पर, प्लास्टिक के डिब्बों में, घर में बनी ताज़ी 'नमकीन' और 'मिठाई' रखी थी.
"नमकीन ले लो! गरमा गरम समोसे! ताज़ी जलेबी!" रोहन ने अपनी आवाज़ को बदलकर, एक साधारण 'मिठाईवाला' का भेष धारण कर लिया था.
उसका चेहरा, जिसे करोड़ों लोग जानते थे, अब एक साधारण टोपी और थोड़ी धूल-मिट्टी से ढका था.
समीर ने उसे अपने पेंटहाउस से निकलते हुए देखा. "यह पागलपन है, रोहन!" उसने हँसते हुए कहा.
"शायद," रोहन ने जवाब दिया, "लेकिन अगर मुझे अपनी 'सही' लड़की मिल गई, तो यह इसके लायक होगा."
उसने अपनी साइकिल को बेंगलुरु के एक ऐसे रिहायशी इलाके की ओर मोड़ा, जहाँ उसके माता-पिता ने एक संभावित वधू का घर बताया था – एक ऐसी लड़की जिसे उसने सिर्फ़ एक औपचारिक मुलाकात में देखा था.
सूरज की किरणें अभी-अभी निकल रही थीं, और हवा में ताज़ी बेक्ड नमकीन की खुशबू घुल रही थी. रोहन को अजीब लग रहा था, एक अरबपति जो अब एक नमकीनवाला बन गया था. लेकिन उसके अंदर एक उत्साह था. यह एक नया रोमांच था, एक ऐसा खेल जिसमें दाँव पर उसका भविष्य था.
उसने अपनी साइकिल की घंटी बजाई और ज़ोर से आवाज़ लगाई, "नमकीन ले लो! गरमा गरम नमकीन!"
यह उसकी पहली चाल थी, उस मायावी खेल की जिसमें वह अपनी दुल्हन को समझने निकला था. उसे नहीं पता था कि यह सफ़र उसे कहाँ ले जाएगा, और क्या वह अपनी सच्ची मोहब्बत को खोज पाएगा.
To be continued......
- Brij
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