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Miss Railway - Episode 10


 

सेंट्रल कमांड सेंटर में, रविंद्र कुमार की विस्तृत योजना सामने आने के बाद, हवा में एक नया, ठंडा डर फैल गया था। मिस्टर वर्मा ने तुरंत उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई। स्क्रीन पर, देश भर के रेलवे ज़ोन के प्रमुखों के चेहरे गंभीर दिख रहे थे, जैसे ही शिबानी ने उन्हें रविंद्र कुमार की विनाशकारी योजना के बारे में जानकारी दी।

"यह एक अभूतपूर्व खतरा है," शिबानी ने दृढ़ता से कहा, "वह सिर्फ़ एक ट्रेन को निशाना नहीं बना रहा था, बल्कि पूरे देश के रेलवे को पंगु बनाना चाहता है। नाशिक स्टेशन पर बिजली गुल करना उसकी बड़ी योजना का सिर्फ़ एक हिस्सा है।"

"हमें क्या करना चाहिए, शिबानी?" एक ज़ोन प्रमुख ने पूछा, उसकी आवाज़ में घबराहट थी।

"हमें तुरंत सभी रेलवे ज़ोन में साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को उच्चतम स्तर पर अपग्रेड करना होगा। सभी सिग्निलिंग हब और नियंत्रण केंद्रों की भौतिक और डिजिटल सुरक्षा बढ़ानी होगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी होगी," शिबानी ने निर्देश दिया। "और नाशिक स्टेशन पर, हमें एक विशेष साइबर सुरक्षा टीम तैनात करनी होगी, जो किसी भी हमले को विफल करने के लिए तैयार रहे।"

उच्च अधिकारियों ने शिबानी के निर्देशों को तुरंत स्वीकार कर लिया। पूरे देश में रेलवे नेटवर्क पर एक हाई अलर्ट जारी कर दिया गया।

इसी बीच, रविंद्र कुमार के लैपटॉप को फोरेंसिक लैब में भेज दिया गया था। शिबानी ने व्यक्तिगत रूप से फोरेंसिक टीम के प्रमुख से बात की। "मुझे हर एक बाइट चाहिए, डॉक्टर। वह कहीं न कहीं कोई सुराग ज़रूर छोड़ गया होगा।"

कुछ घंटों बाद, फोरेंसिक टीम ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट भेजी। "मैम, हमने लैपटॉप से कुछ आंशिक डेटा रिकवर किया है। ऐसा लगता है कि रविंद्र कुमार एक एन्क्रिप्टेड चैट एप्लिकेशन का उपयोग कर रहा था, और हमने उसमें से कुछ बातचीत के टुकड़े रिकवर किए हैं।"

"क्या मिला?" शिबानी ने पूछा, उसकी उम्मीदें बढ़ गईं।

"बातचीत बहुत एन्क्रिप्टेड है, लेकिन कुछ कीवर्ड्स और लोकेशन कोड्स मिले हैं। ऐसा लगता है कि वह किसी 'मास्टर' या 'गुरु' से निर्देश ले रहा था," फोरेंसिक प्रमुख ने बताया। "और एक लोकेशन कोड है - 'पुराना किला', दिल्ली।"

शिबानी का दिमाग तेज़ी से चला। दिल्ली का पुराना किला? यह एक ऐतिहासिक स्थल था, लेकिन उसका रेलवे से क्या संबंध? क्या रविंद्र कुमार अकेला नहीं था? क्या उसके पीछे कोई बड़ा संगठन था?

"इंस्पेक्टर राजेश, क्या आपको रविंद्र कुमार के अपार्टमेंट से कोई व्यक्तिगत सामान मिला?" शिबानी ने हेडसेट पर पूछा।

राजेश ने जवाब दिया, "हाँ मैम, हमें कुछ डायरियाँ और पुरानी तस्वीरें मिली हैं। उसकी एक डायरी में कुछ अजीब रेखाचित्र हैं, जो रेलवे ट्रैक और सिग्नलों जैसे लगते हैं, लेकिन एक विकृत तरीके से।"

"उन रेखाचित्रों की तस्वीरें भेजो, इंस्पेक्टर! और डायरी में कोई भी अजीब नोट या नाम ढूंढो," शिबानी ने निर्देश दिया।

शिबानी ने फोरेंसिक रिपोर्ट में मिले 'पुराना किला' के लोकेशन कोड और डायरी में मिले रेखाचित्रों को जोड़ना शुरू किया। उसे लगा कि यह सिर्फ़ एक हैकर का बदला नहीं था, बल्कि कुछ बड़ा, कुछ गहरा था।

स्क्रीन पर, नाशिक स्टेशन पर हमले के लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी थी - अब सिर्फ़ २२ घंटे बचे थे। शिबानी को पता था कि उसके पास बहुत कम समय था। उसे न केवल रविंद्र कुमार को रोकना था, बल्कि उसके पीछे के 'मास्टर' और उसकी पूरी योजना को भी बेनकाब करना था। यह लड़ाई अब सिर्फ़ रेलवे की सुरक्षा की नहीं थी, बल्कि देश की संप्रभुता की थी। शिबानी ने गहरी साँस ली, और फिर से अपनी आँखें स्क्रीन पर केंद्रित कर लीं। असली खेल अब शुरू हुआ था।

दिल्ली का पुराना किला। शिबानी के दिमाग में यह नाम बार-बार घूम रहा था। एक ऐतिहासिक स्मारक, जिसका रेलवे के साइबर हमले से क्या संबंध हो सकता है? यह सवाल उसे अंदर तक परेशान कर रहा था। उसने तुरंत पुराना किला के बारे में जानकारी खंगालना शुरू किया – उसके इतिहास, उसकी संरचना, और क्या वहाँ कोई भूमिगत मार्ग या गुप्त कक्ष हो सकते हैं।

"मिस्टर वर्मा, हमें तुरंत दिल्ली के लिए एक टीम भेजनी होगी। RPF की एक विशेष टीम, जो पुराना किला की जाँच कर सके," शिबानी ने कहा।

"मैं तुरंत व्यवस्था करता हूँ," वर्मा जी ने जवाब दिया, उनकी आवाज़ में अब एक नई दृढ़ता थी। "लेकिन शिबानी, तुम्हें क्या लगता है कि वहाँ क्या मिलेगा?"

"मुझे नहीं पता, सर। लेकिन रविंद्र कुमार अकेला नहीं है। उसके पीछे कोई 'मास्टर' है, और यह जगह उस 'मास्टर' से जुड़ी हो सकती है," शिबानी ने कहा। "शायद यह उनका मुख्यालय है, या कोई गुप्त मीटिंग पॉइंट।"

इसी बीच, इंस्पेक्टर राजेश ने रविंद्र कुमार की डायरी से रेखाचित्रों की तस्वीरें भेजीं। शिबानी ने उन्हें अपने बड़े स्क्रीन पर खोला। वे वास्तव में रेलवे ट्रैक और सिग्नलों के विकृत चित्र थे, लेकिन उनमें कुछ अजीबोगरीब प्रतीक भी थे, जो किसी प्राचीन लिपि या गुप्त कोड जैसे लग रहे थे।

"यह सिर्फ़ रेलवे के चित्र नहीं हैं, इंस्पेक्टर। इनमें कुछ और भी छिपा है," शिबानी ने राजेश से कहा। "क्या डायरी में इन प्रतीकों से जुड़ा कोई नोट है?"

"मैम, डायरी में कुछ अजीबोगरीब कविताएँ और दर्शन लिखे हैं, जो बहुत ही अस्पष्ट हैं। लेकिन एक जगह, एक प्रतीक के साथ 'पुनरुत्थान' शब्द लिखा है," राजेश ने जवाब दिया।

'पुनरुत्थान'? शिबानी के दिमाग में एक और पहेली जुड़ गई। क्या यह किसी पुराने संगठन का पुनरुत्थान था, या किसी पुरानी विचारधारा का?

शिबानी ने तुरंत फोरेंसिक टीम को रविंद्र कुमार के लैपटॉप से रिकवर किए गए एन्क्रिप्टेड चैट के टुकड़ों और डायरी के रेखाचित्रों और प्रतीकों को एक साथ विश्लेषण करने का निर्देश दिया। "मुझे इन प्रतीकों का मतलब चाहिए, डॉक्टर। और चैट में 'मास्टर' कौन है, यह भी।"

स्क्रीन पर, नाशिक स्टेशन पर हमले के लिए उलटी गिनती तेज़ी से घट रही थी - अब सिर्फ़ २० घंटे बचे थे। समय उनके खिलाफ था।

दिल्ली में, RPF की टीम पुराना किला की ओर बढ़ रही थी। शिबानी ने उन्हें किला के लेआउट और संभावित गुप्त स्थानों के बारे में जानकारी दी। उसने उन्हें विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा जहाँ कोई असामान्य गतिविधि या नए निर्माण के निशान हो सकते थे।

"हमें नाशिक स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ानी होगी, सर। रविंद्र कुमार ने अपनी योजना का विवरण दिया है, और वह जानता है कि हम जानते हैं। वह अपनी रणनीति बदल सकता है," शिबानी ने वर्मा जी से कहा।

"मैंने पहले ही आदेश दे दिए हैं, शिबानी। नाशिक पर हर कोने पर नज़र रखी जा रही है। हमारी साइबर सुरक्षा टीम भी पूरी तरह से तैयार है," वर्मा जी ने आश्वासन दिया।

शिबानी ने अपनी आँखें बंद करके गहरी साँस ली। यह एक जटिल जाल था, जिसे रविंद्र कुमार ने बुना था, लेकिन उसके पीछे एक अदृश्य हाथ था - 'मास्टर'। उसे इस 'मास्टर' की पहचान करनी थी, और उसकी पूरी योजना को विफल करना था, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। यह सिर्फ़ एक साइबर युद्ध नहीं था, बल्कि एक वैचारिक लड़ाई थी, जो देश के भविष्य को निर्धारित करेगी।

To be continued.............

- Brij 

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