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लापता लम्हे - Chapter 1

  अध्याय एक: पता नहीं मुंबई की सुबह हमेशा साफ़ नहीं होती। कभी वह समुद्र की नमकीन हवा लेकर आती है, कभी ट्रैफिक की गर्म सांस, और कभी किसी अनकहे डर की हल्की-सी गंध। उस दिन भी सुबह ऐसी ही थी। लोकमान्य तिलक अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर चायवाला स्टील के गिलास खड़खड़ा रहा था। ऑटो वालों की कतार के पीछे एक साइकिल वाला अख़बार बांटते-बांटते गला फाड़कर किसी राजनीतिक बहस की खबर सुना रहा था। और उसी शोर के बीच, तीसरी मंज़िल के कॉरिडोर में, एक लड़की खिड़की के पास खड़ी थी जैसे उसने अपने भीतर के सारे शब्द खिड़की के बाहर फेंक दिए हों। उसका नाम अनाया था। उम्र सत्ताईस के आसपास, पर चेहरा ऐसा जैसे पिछले छह महीनों ने उसे छत्तीस का बना दिया हो। बाल जल्दी में बाँधे थे। आँखों के नीचे हल्की स्याही-सी थकान। हाथ में एक पुरानी फ़ाइल थी, जिसमें उसके कुछ काग़ज़, एक मोबाइल, एक अधखुला लिफ़ाफ़ा और बच्चे की रिपोर्ट रखी थी। मोबाइल पर बार-बार वही नाम चमकता, फिर बुझ जाता  "राघव" । राघव मेहरा। वह आदमी जिसने तीन महीने पहले कहा था, “मैं बस एक हफ्ते के लिए दिल्ली जा रहा हूँ। वहाँ का काम खत्म होते ही लौट आऊँगा।” और फिर… और...
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मिस्टिक मसाला: अमृत कुंभ की कहानी - अध्याय 1

  मुंबई की भीड़-भाड़ वाली सड़कों पर, जहाँ हवा मसालों की खुशबू और रिक्शे के हॉर्न की आवाज़ से भरी हुई थी, वहाँ "मिस्टिक मसाला" नाम का एक छोटा सा, सादा सा पिज़्ज़ेरिया था। दुकान एक पतली गली में थी, उसका नियॉन साइन बीच-बीच में टिमटिमा रहा था, जिससे पत्थर के फुटपाथ पर एक गर्म रोशनी पड़ रही थी। पिज़्ज़ेरिया इटैलियन ट्रेडिशन और इंडियन फ्लेवर का एक अनोखा मिक्स था , जो इसके मालिक, रमेश पटेल के अलग-अलग तरह के टेस्ट का सबूत था। रमेश, एक अधेड़ उम्र के आदमी जिन्हें कहानियाँ सुनाने का शौक था, उन्हें यह पिज़्ज़ेरिया अपने पिता से विरासत में मिला था, जो इटली का एक टुकड़ा भारत के दिल में लाने का सपना देखते थे। इतने सालों में, मिस्टिक मसाला एक लोकल कहानी बन गया था, न सिर्फ़ अपने अनोखे फ्यूज़न पिज़्ज़ा के लिए बल्कि उन अजीब घटनाओं के लिए भी जो इसके आस-पास घूमती रहती थीं। वहाँ के लोग फुसफुसाते थे कि पिज़्ज़ेरिया एक ऐसी जगह है जहाँ आम और खास के बीच का पर्दा बहुत हल्का होता है। एक दोपहर, जब सूरज बेरहमी से सिर पर चमक रहा था, प्रिया नाम की एक जवान लड़की मिस्टिक मसाला में पहुँची। वह राजस्थान के एक छोट...

विश्वास की मिठास - Episode 04

विक्रम को अनन्या के बंगले से निकलते हुए देखने के बाद, रोहन की रातों की नींद उड़ गई थी. सिर्फ़ व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता ही नहीं, बल्कि एक अजीब सी निजी ईर्ष्या उसके अंदर पनप रही थी.  अगली सुबह, वह समीर के साथ अपने पेंटहाउस में बैठकर चाय पी रहा था, लेकिन उसके दिमाग में वही दृश्य घूम रहे थे. "यार समीर, विक्रम उस गली में क्या कर रहा था?" रोहन ने परेशान होकर पूछा. "कहीं वह भी...?" समीर ने अपनी दाढ़ी खुजाई. "क्यों नहीं? अनन्या सिर्फ़ खूबसूरत ही नहीं है, उसके पिता एक बड़े आर्किटेक्ट हैं, उनका अच्छा खासा नाम है. विक्रम जैसा महत्वाकांक्षी आदमी, जो हर चीज़ में नंबर वन रहना चाहता है, उसके लिए यह एक अच्छा 'प्रोजेक्ट' हो सकता है." समीर ने 'प्रोजेक्ट' शब्द पर ज़ोर दिया, यह जानते हुए कि रोहन को यह पसंद नहीं आएगा. "प्रोजेक्ट नहीं," रोहन ने कहा, "वह एक इंसान है, समीर!" "हाँ, तो तुम भी तो उसी इंसान को जानने के लिए मिठाईवाला बने फिर रहे हो," समीर ने मज़ाक किया. "फर्क़ सिर्फ़ इतना है कि वह अपने असली रूप में जा रह...

विश्वास की मिठास - Episode 03

कुछ हफ़्तों तक, रोहन ने अपने 'मिठाईवाला' के भेष को पूरी तरह अपना लिया. सुबह जल्दी उठना, घर पर नमकीन और जलेबियाँ पैक करना (जो अब समीर की देखरेख में एक छोटे से किचन में प्रोफेशनल शेफ द्वारा तैयार की जाती थीं), और फिर अपनी पुरानी साइकिल पर बेंगलुरु की सड़कों पर निकल पड़ना – यह उसकी दिनचर्या बन गई थी. उसने जानबूझकर अनन्या की गली को अपने "नियमित रूट" में शामिल कर लिया था. हर सुबह, वह अनन्या के बंगले के पास से गुज़रता, अपनी घंटी बजाता और ज़ोर से आवाज़ लगाता. कभी अनन्या की माँ बाहर आतीं, कभी नौकरानी, और कभी-कभी खुद अनन्या भी. रोहन ने देखा कि अनन्या सुबह की सैर पर जाती थी, अक्सर एक किताब हाथ में लिए बगीचे में बैठती थी, और कभी-कभी अपने कुत्ते के साथ खेलती थी. ये छोटे-छोटे अवलोकन उसे उसके कॉर्पोरेट जीवन की बड़ी-बड़ी मीटिंग्स से ज़्यादा दिलचस्प लगने लगे थे. एक दिन, जब रोहन अनन्या के घर के पास था, उसने देखा कि अनन्या अपने बगीचे में कुछ पौधों को पानी दे रही थी. वह एक साधारण टी-शर्ट और ट्रैक पैंट में थी, उसके बाल बिखरे हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी. रोहन न...

विश्वास की मिठास - Episode 02

बेंगलुरु की सड़कें सुबह की आपाधापी में सराबोर थीं. एक तरफ़ तेज़ रफ़्तार गाड़ियाँ धूल उड़ाती गुज़र रही थीं, तो दूसरी तरफ़ पैदल चलने वालों की भीड़ थी. इसी सब के बीच, रोहन मल्होत्रा, जो अब एक साधारण 'मिठाईवाला' बना हुआ था, अपनी पुरानी साइकिल के पैडल मार रहा था. उसके कंधे दुखने लगे थे, और हाथ में पकड़ी घंटी को लगातार बजाने से कलाई में दर्द होने लगा था. "नमकीन ले लो! गरमा गरम नमकीन!" उसकी आवाज़, जिसे वह जानबूझकर थोड़ा मोटा और ज़ोरदार बनाए हुए था, गली में गूँज रही थी. यह उसकी 'नई पहचान' थी, जो उसे एक अरबपति से एक मामूली विक्रेता में बदल चुकी थी. शुरुआत में उसे अजीब लगा. लोग उसे अनदेखा कर रहे थे, या फिर अजीब नज़रों से देख रहे थे. कुछ ने उसे रोका भी, लेकिन मोल-भाव ऐसा करते कि उसे शर्मिंदगी महसूस होती. एक छोटी बच्ची ने तो यहाँ तक कह दिया, "अंकल, आपकी मिठाई के डिब्बे तो बहुत गंदे हैं." रोहन को अपनी महंगी कारों और साफ़-सुथरे ऑफ़िस की याद आई, जहाँ हर चीज़ चमकती रहती थी. लेकिन धीरे-धीरे, उसने खुद को ढालना शुरू कर दिया. उसे पता चला कि मोल-भाव कैसे करना...

विश्वास की मिठास - Episode 01

बंगलुरू की रातें, सिलिकॉन वैली की चमक और दक्षिण भारत की पारंपरिक खुशबू का एक अनूठा मिश्रण थीं. गगनचुंबी इमारतें तारों को छूने की होड़ में थीं, और उनके नीचे, पब और कैफे में युवा पीढ़ी की धड़कनें गूँज रही थीं.  इसी शहर के सबसे पॉश पेंटहाउस में बैठा था रोहन मल्होत्रा, 'टेक-गुरु' और 'मिलेनियल बिलियनेयर' के नाम से मशहूर. उसकी कंपनी, 'इन्नोवोटेक', ने हाल ही में एक नया AI प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया था, जिसने उसे रातों-रात और भी ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया था. लेकिन आज, रोहन के चेहरे पर वह चमक नहीं थी जो आमतौर पर उसकी सफलताओं के बाद दिखती थी. उसके सामने एक ट्रे में महंगी विदेशी शराब रखी थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था. वह अपनी बालकनी से शहर की रोशनी को देख रहा था, जहाँ हर चमकती खिड़की के पीछे एक अलग कहानी थी. "क्या हुआ मेरे दोस्त? अरबों का सौदा हो गया, फिर भी मुँह लटका हुआ है?" उसके बचपन का दोस्त और 'इन्नोवोटेक' का सह-संस्थापक, समीर, उसके बगल में आकर बैठा. समीर ही था जिससे रोहन अपनी हर बात साझा करता था. रोहन ने एक गहरी साँस ली. "यार, पेरेंट्स ...

Miss Railway - Episode 11

    दिल्ली में , RPF की विशेष टीम पुराना किला के परिसर में प्रवेश कर चुकी थी। रात के इस पहर में , किला का प्राचीन और विशाल ढाँचा और भी रहस्यमय लग रहा था। टीम के सदस्य , अत्याधुनिक उपकरणों से लैस , शिबानी के निर्देशों का पालन करते हुए , हर कोने की सावधानी से जाँच कर रहे थे। " मैम , हम किले के अंदर हैं। यहाँ कोई असामान्य गतिविधि नहीं दिख रही है , लेकिन कुछ जगहों पर ताज़ी पदचाप के निशान हैं ," RPF इंस्पेक्टर ने शिबानी को हेडसेट पर बताया। " सतर्क रहें , इंस्पेक्टर। रविंद्र कुमार अकेला नहीं है , और ' मास्टर ' बहुत चालाक हो सकता है ," शिबानी ने चेतावनी दी। टीम ने किले के भूमिगत मार्गों और गुप्त कक्षों की तलाश शुरू की , जैसा कि शिबानी ने अनुमान लगाया था। उन्हें एक प्राचीन बावड़ी के पास एक छिपा हुआ प्रवेश द्वार मिला , जो झाड़ियों और मलबे से ढका हुआ था। " मैम , हमें एक गुप्त प्रवेश द्वार मिला है! यह एक पुरानी बावड़ी के नीचे है ," इंस्पेक्टर ने कहा। "Good ! सावधानी से अंदर जाओ। यह उनका ठिकाना हो सकता है ," शिबानी ने निर्देश दिया। RPF टी...